राज्य आंदोलन के दौरान गठित संगठन

कुमाऊँ परिषद – उत्तराखंड मे सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक व शैक्षणिक समस्याओं को लेकर गोविंद बल्लभ पंत, बदरीदत्त पांडे, हरगोविंद पंत आदि नेताओं द्वारा इस परिषद का गठन किया गया था , लेकिन 1926 मे इसका विलय काँग्रेस मे हो गया था ।

गधदेश सेवा संघ – अलग राज्य के उद्देश्य को लेकर 1938 मे दिल्ली मे इस संघ का गठन सुमन द्वारा किया गया । बाद मे इसका नाम हिमालया सेवा संघ हो गया ।

गढ़वाल जागृत संस्था – 1939 मे काँग्रेस द्वारा पौडी मे इस संस्था का गठन किया गया । प्रताप सिंह नेगी और उमानन्द बडथवाल इस संस्था के प्रमुख थे।

पर्वतीय विकास जन समिति – कांगड़ा से अल्मोड़ा तक एक ही हिमालया राज्य की स्थापना के लिए इस समिति का गठन 1950 मे नई दिल्ली मे किया गया था ।

पर्वतीय राज्य परिषद  15 जून 1967 को रामनगर के जनसभा मे एक पृथक प्रसाशनिक इकाई का गठन का प्रस्ताव पारित किया गया। और प्रस्ताव के कार्यान्वयन हेतु दयाकृष्ण पांडे की अध्यक्षता मे इस परिषद का गठन किया गया । 1973 मे इस गठन का पुनर्गठन किया गया । और दो सांसदो (प्रताप सिंह नेगी और नरेंद्र सिंह बिष्ट) को इसमे शामिल करते हुये इसका नाम पृथक पर्वतीय राज्य परिषद कर दिया गया ।

कुमाऊँ राष्ट्रिय मोर्चा – नए राज्य का उद्देश्य लेकर 3 October 1970 को कामरेड पी0 सी0 जोशी द्वारा यह संगठन बनाया गया ।

उत्तरांचल परिषद – 7 जून 1972 को नैनीताल मे इस परिषद का गठन स्थानीय समस्याओं पृथक राज्य के लिए संघर्ष करने के उद्देश्य से किया गया था ।

उत्तराखंड क्रांति दल – 24 औए 25 जुलाई 1979 को मसूरी के सम्मेलन मे इस दल की स्थापना की गई इसके प्रथम अध्यक्ष डॉ0 देविदत्त पंत थे ।

उत्तरांचल उत्थान परिषद – 30-31 मई 1988 को सोहन सिंह जीना की अध्यक्षता मे इस परिषद का गठन किया गया।

उत्तराखंड सयुन्त संघर्ष समिति – 11-12 जनवरी 1989 को जनसंघर्ष वाहिनी, उत्तराखंड जन परिषद , उत्तराखंड रक्षा मंच और युवा जनता दल ने सयुंक्त रूप से दिल्ली मे इस संघर्ष समिति का गठन किया । द्वारिका प्रसाद उनियाल समिति के प्रमुख चुने गये थे ।

उत्तराखंड मुक्ति मोर्चा – वामपंथी धारा से जुड़े लोगों ने 1991 मे इस मोर्चे का गठन किया ।

सयुक्त उत्तराखंड राज्य मोर्चा – बहादुर राम टमटा द्वारा सयुंक्त उत्तराखड् राज्य मोर्चा का गठन अप्रैल 1994 मे किया गया । इसका उद्देश्य राज्य निर्माण मे सहयोग करना था ।

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