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गोरखा आक्रमण के समय चंद शासक था – महेंद्र चंद
हर्षदेव जोशी ने किस गोरखा राजा से समझौता किया था – राजा रण बहादुर शाह
गोरखाओं ने चंद राज्य मे आक्रमण किया – 1790 ई0
1790 मे कुमाऊँ मे आक्रमण करने के दौरान नेपाल का राजा था – राजा रण बहादुर शाह (1777 – 1804)
गोरखाओं और चंदों के बीच युद्ध हुआ – हवालबाग मे
चंदो पर आक्रमण करते समय गोरखा सैनिकों का नेत्रत्व किया – हस्तीदल चौतरिया , अमर सिंह थापा, जगजीत पांडे और सूरवीर थापा
गोरखा सेना ने पँवार राज्य मे आक्रमण किया – 1791 मे
गोरखा सेना और पँवार सेना के बीच युद्ध हुआ – लंगूरगढ़ मे
गोरखा सेना और पँवार राजा प्रदूम्न्शाह के बीच श्रीनगर की संधि हुई – 1792 ई0 मे
गोरखाओं और पँवार राजा प्रदूम्न्शाह के बीच संधि के अनुसार रखी गयी शर्त थी –
(1) पँवार राजा को नेपाल की अधीनता स्वीकार करनी थी
(2) एक नेपाली प्रतिनिधि अपने व्यय पर अपने दरबार मे रखना था
(3) और वार्षिक कर 3000 रुपए देने थे जो बाद मे 9000 रुपए हो गया ।
गोरखा सेना ने पुनः पँवार राज्य मे आक्रमण कर श्रीनगर मे अधिकार कर लिया – 1803 मे
गोरखा सेना और पँवार राजा प्रद्युम्न शाह के बीच निर्णायक युद्ध हुआ – खुड्बुड़ा मे 1804 मे
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गोरखों के राज को घृणा से जनता द्वारा कहा जाता है – गोरख्याली
कुमाऊँ पर गोरखाओ के अधिकार के बाद प्रथम गोरखा सूबेदार था – जोग मल्ल शाह
कुमाऊँ का दूसरा सुब्बा या सुब्बेदार था – काजी नर शाही
चौतरिया बमशाह सूबेदार बना – 1814 मे
1815 मे सूबेदार था – फ्रेज़र साहब बहादुर
गोरखा शासन मे ब्राह्मण दासों को कहा जाता था – कठुआ
ब्रिटिश व नेपाल युद्ध का मुख्य कारण था – गोरखपुर मे ईस्ट इंडिया कंपनी से 200 ग्राम छीनना
गोरखा सेनिको का प्रमुख हथियार था – खुंकरी
खुंकरी बनाने का मुख्य स्थल था – गढ़ी
खुकरिया किस जाति के लोहार बनाते थे – नेवार
गोरखों ने ब्राह्मणो पर कौन सा कर लगाया था – कुसही
सुदर्शन शाह ने किस अंग्रेज़ गवर्नर से सहायता मांगी – वारेन हेंस्टिग से
जब अंग्रेज़ो के साथ टकराव प्रारम्भ हुआ उस समय नेपाल का प्रधानमंत्री था – भीमसेन थापा
ब्रिटिश जनरलो मे योग्यतम सेनापति था – ओक्टरलोनी
खलूँगा किले पर गोरखों का नेत्रत्व कर रहा था – बलभद्र सिंह थापा
खलूँगा किले पर किस अंग्रेज़ जनरल की मृत्यु हो गई – जनरल जिलेस्पी
अंग्रेज़ो ने देहारादून पर अधिकार किया – 30 नवंबर 1814 ई0 मे
अंग्रेज़ो ने अल्मोड़ा पर आक्रमण किया – 25 अप्रैल 1815
कमिश्नर गार्डनर और गोरखा सेनापति बमशाह के बीच संधि हुई – 27 अप्रैल 1815 मे
संगोलि की संधि हुई – नवम्बर 1815 मे
नेपाल सरकार द्वारा संगोलि की संधि मानी गई – 4 मार्च 1816 को
किस अंग्रेज़ कप्तान ने हर्षदेव जोशी को कुमाऊ का अर्ल्वार्विक कहा है – कप्तान हिरेसी ने
किनके सेनिकों मे जागरिया और ढाकरिया प्रकार के सैनिक पाये जाते थे – गोरखा सेनिकों मे
गोरखा न्याय प्रशासन मे मामलों की सुनवाई करता था – विचारी
गोरखा न्याय प्रशासन मे गोला दीप, तराजू दीप , कढ़ाई दीप, जल दीप, जहर दीप, मंदिर दीप थे – दंड प्रथा
गोरखा न्याय प्रशासन मे राजद्रोह और गौहत्या के लिए दंड था – मृत्यु दंड
कर जो गोरखों द्वारा लगाए गए
पूंगाड़ी – भूमि कर था सेनिकों की आय इसी कर से जाती थी ।
टीका भेंट – शादी व विवाह के समय
मांगा – प्रत्येक नौजवान से एक रुपए लिया जाता था
टांड कर – बुनकरों से
मरों कर – पुत्रहीन व्यक्ति से
1796 मे चंपावत के बालेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार किस गोरखा सूबेदार ने कराया – महावीर थापा
केदारनाथ मंदिर को सदावर्त चलाने के लिए दान दिया – रणबहादुर शाह की पत्नी कान्ति देवी ने
नेपाल का समूचा साहित्य नेवारी भाषा में मिलता है ।
मोलराम ने किस गोरखा सूबेदार को दानवीर कर्ण कहा है – रणज़ोर सिंह थापा
नेपाल सरकार का सर्वोच्च अलंकार काजी से विभूषित किया गया – अमर सिंह थापा को
रणबहादुर शाह साधु बनके कौन सा नाम अपना लिया – स्वामी निर्गुणनन्द
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