भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच सबसे बड़ी मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ। इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है, क्योंकि यह दोनों पक्षों द्वारा अब तक का सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी व्यापार समझौता है।
यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों (भारत की 1.45 अरब आबादी + EU के 450 मिलियन) को कवर करता है और वैश्विक GDP का करीब 25% हिस्सा शामिल करता है।
यह समझौता 2007 से चली आ रही लंबी बातचीत के बाद 2022 में फिर शुरू हुई और अक्टूबर 2025 में अंतिम दौर के बाद जनवरी 2026 में पूरा हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संयुक्त रूप से इसकी घोषणा की।
मुख्य विशेषताएं:
EU के 96.6% सामानों पर भारत में टैरिफ कम या खत्म होंगे, जिससे EU के निर्यात को 2032 तक दोगुना होने की उम्मीद है।
भारत के निर्यात पर EU में 99.5% टैरिफ लाइनों (ट्रेड वैल्यू का 99%+) पर शुल्क हटाए जाएंगे, खासकर टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, लेदर और फार्मा जैसे सेक्टर में फायदा।
दोनों पक्षों को सालाना €4 बिलियन (लगभग ₹35,000 करोड़) की ड्यूटी बचत होगी।
संवेदनशील क्षेत्र जैसे डेयरी, चीनी और कुछ कृषि उत्पादों को बाहर रखा गया है।
ऑटोमोबाइल और शराब पर कोटा-आधारित व्यवस्था से संतुलन बनाया गया।
यह समझौता US के बढ़ते टैरिफ (2025 से 50% तक) के बीच भारत की ट्रेड डाइवर्सिफिकेशन और EU की डी-रिस्किंग रणनीति का हिस्सा है।
यह FTA भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत बनाएगा, निवेश बढ़ाएगा और रोजगार सृजन करेगा।
औपचारिक हस्ताक्षर और लागू होना 2026-2027 में होने की संभावना है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लंबे समय तक लाभ मिलेगा।
