मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 4 मार्च 2021 को विधानसभा में गैरसैंण को मंडल बनाने की घोषणा कर दी। इस मंडल में कुमाऊं और गढ़वाल के दो दो जिलों को सम्मिलित किया गया है। गढ़वाल, कुमाऊं के बाद राज्य के गैरसैंण मंडल में चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले शामिल किए गए हैं। गैरसैंण मंडल मुख्यालय होगा। विधानसभा में बजट भाषण समाप्त करने के बाद मुख्यमंत्री ने गैरसैंण को मंडल बनाने का एलान किया।गैरसैंण में कमिश्नर और डीआईजी स्तर का अधिकारी बैठेगा। गैरसैंण के सुनियोजित नगरीय विकास के लिए एक महीने में टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बता दें कि मुख्यमंत्री ने पिछले साल 4 मार्च 2020 के ही दिन भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा की थी ।
गैरसेण राजधानी घटनाक्रम
60 के दशक में राजधानी के तौर पर गैरसैण का नाम सबसे पहले वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने आगे किया था।
सन् 1971 में डीडी पंत और विपिन त्रिपाठी ने गैरसैंण को उत्तराखंड की प्रस्तावित राजधानी के रूप में शामिल किया था।
सन् 1991 में गैरसैंण में अपर शिक्षा निदेशालय एवं डायट का उद्घाटन हुआ ।
24-25 जुलाई 1992 को उक्रांद ने पेशावर कांड के महानायक वीर चन्द्रसिंह गढ़वाली के नाम पर गैरसैंण राजधानी क्षेत्र का नाम चन्द्रनगर रखा था।
सन् 1994 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा गठित रमाशंकर कौशिक की अगुआई वाली एक समीति ने उत्तराखण्ड राज्य के साथ-साथ गैरसैंण राजधानी की भी अनुशंसा की थी।
1 फरवरी 2003 राजधानी चयन आयोग का गठन किया जिसके अध्यक्ष जस्टिस वीरेंद्र दीक्षित थे ।
8 अगस्त 2004 मे बाबा मोहन उत्तराखंडी गैरसेण राजधानी मांग को लेकर 38 दिनों के आमरण अनशन के बाद शहीद हो गए
17 अगस्त 2008 को दीक्षित रिपोर्ट ने गैरसेण राजधानी को लेखर कई खामिया गिनाकर देहरादून को स्थायी राजधानी बनाने की सिफ़ारिश की ।
3 नवम्बर 2012 को गैरसेण मे मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मंत्रिपरिषद की बैठक की ।
14 जनवरी 2013 को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने द्वितीय विधानसभा भवन का शिल्यानास किया ।
मई 2014 में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा जनपद चमोली के विकासखण्ड गैरसैंण और जनपद अल्मोड़ा के विकासखण्ड चौखुटिया को शामिल कर ‘गैरसैंण विकास परिषद’ गठित करने का निर्णय लिया गया ।
8 जून 2014 को विधानसभा का पहला सत्र गैरसेण मे चलाया गया ।
2015 – 2016 में गैरसैण को नगर पंचायत का दर्जा दे दिया गया ।
4 मार्च 2020 को उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री, त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा में बजट सत्र के दौरान घोषणा की कि गैरसैंण राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी होगी
8 जून 2020 को गैरसेण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया ।
चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा और बागेश्वर को मिलाकर गैरसेण मण्डल का गठन किया जा रहा है
रुद्रप्रयाग जिले का गठन – 18 सितम्बर 1997 को हुआ ।
बागेश्वर जिले का गठन – 18 सितंबर 1997 को हुआ ।
चमोली जिले का गठन – 24 फरवरी 1960 को हुआ ।
अल्मोड़ा जिले का गठन – 1891 को हुआ ।
अन्य जिलों का गठन
चंपावत जिले का गठन – 15 सितम्बर 1997 को
उधम सिंह नगर का गठन – 26 दिसम्बर 1995 को
हरिद्वार जिले का गठन – 28 दिसम्बर 1988 को
उत्तरकाशी जिले का गठन – 24 फरवरी 1960
पिथौरागढ़ जिले का गठन – 24 फरवरी 1960 को
नैनीताल जिले का गठन – 1891 को
पौड़ी जिले का गठन – 1839 मे
देहरादून जिले का गठन – 1817 को
टिहरी जिले का गठन – 28 दिसम्बर 1815 को
